
राज्य स्तरीय अगुवा सम्मेलन में S S Mahali ने रखे महत्वपूर्ण सुझाव
- S S Mahali

- 4 अग॰
- 4 मिनट पठन
अपडेट करने की तारीख: 6 अग॰
परंपरा, पंचायत और प्रथागत व्यवस्थाओं में सामंजस्य की पहल
PESA नियमावली 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्य स्तरीय अगुवा सम्मेलन

दिनांक: 4 अगस्त 2026
झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में PESA नियमावली 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से "परंपरा, पंचायत और प्रथागत व्यवस्थाओं में सामंजस्य की पहल" विषय पर राज्य स्तरीय अगुवा सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों के लगभग 16 जिलों की लगभग 1600 ग्राम सभाओं को सशक्त बनाते हुए पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था, पंचायत व्यवस्था तथा प्रथागत कानूनों के बीच समन्वय स्थापित करना था, ताकि ग्राम सभा को संवैधानिक एवं व्यवहारिक रूप से अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

कार्यक्रम में PESA संबंधित विषयों पर विस्तारपूर्वक संवाद किया गया तथा PESA नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्राम सभा की केंद्रीय भूमिका पर विशेष बल दिया गया। सम्मेलन में लगभग 200 प्रतिनिधि एवं अगुवा उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में सुश्री बी. राजेश्वरी, निदेशक, पंचायती राज विभाग, झारखंड तथा सुश्री रश्मि लकड़ा, उप निदेशक, पंचायती राज विभाग की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि PESA नियमावली का वास्तविक उद्देश्य ग्राम सभा को निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में स्थापित करना है तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों और पारंपरिक स्वशासन संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
सम्मेलन में निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों पर राज्य स्तरीय अगुवाओं, पारंपरिक स्वशासन प्रतिनिधियों एवं विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए —
- ग्राम सभा की शक्तियाँ, अधिकार एवं दायित्व तथा उसके सशक्तिकरण की रणनीति।
- परंपरागत ढंग से विवादों का समाधान, सुनवाई की प्रक्रिया एवं ग्राम सभा की निर्णय प्रणाली।
- लघु वनोपज (Minor Forest Produce) के संरक्षण, संवर्धन, संग्रहण एवं संसाधनों के न्यायसंगत बंटवारे में ग्राम सभा की भूमिका।
- ग्राम स्तर पर PESA नियमावली 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियाँ तथा उनके व्यावहारिक समाधान।
- जल संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन एवं सामाजिक-आर्थिक विकास में ग्राम सभा की जिम्मेदारियाँ।
- खनिज संसाधन प्रबंधन तथा प्राकृतिक संसाधनों पर ग्राम सभा के अधिकार एवं दायित्व।
- ग्राम सभा की ऑर्गेनिक (स्वाभाविक एवं मूलभूत) भूमिका को मजबूत करने की आवश्यकता।
"परंपरा, पंचायत और प्रथागत व्यवस्थाओं में सामंजस्य की पहल" विषयक राज्य स्तरीय अगुवा सम्मेलन में मुसाबनी प्रखंड से S S Mahali ने सहभागिता करते हुए झारखंड पेसा नियमावली, 2025 में आवश्यक संशोधनों एवं सुधारों पर अपने महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।
उन्होंने कहा कि पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को लघु खनिजों के प्रबंधन का पूर्ण एवं प्रभावी अधिकार प्राप्त होना चाहिए। इस अधिकार पर किसी प्रकार की अनावश्यक शर्त, सीमित बाध्यता अथवा प्रशासनिक प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से सुझाव दिया कि ग्राम सभा को कैटेगरी-1, कैटेगरी-2 अथवा किसी अन्य सीमित वर्गीकरण के माध्यम से केवल आंशिक अधिकार देना PESA की मूल भावना के विपरीत है। ऐसा करने से ग्राम सभाएँ अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रयोग में निर्भर एवं सीमित हो जाएँगी।
S S Mahali ने आग्रह किया कि ग्राम सभा को अपने अधिकार क्षेत्र में उपलब्ध सभी प्रकार के लघु खनिजों के संरक्षण, उपयोग, प्रबंधन, नियंत्रण तथा उससे प्राप्त लाभों के वितरण का पूर्ण अधिकार सुनिश्चित किया जाए। यह अधिकार संविधान की पाँचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम, 1996 तथा झारखंड पेसा नियमावली की भावना के अनुरूप होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम सभा एक स्वायत्त एवं सर्वोच्च स्थानीय स्वशासी संस्था है, इसलिए उसके अधिकार क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में किसी बाहरी व्यक्ति, संस्था अथवा सरकारी एजेंसी का अनावश्यक हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। ग्राम सभा की पूर्व सहमति एवं निर्णय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अंत में उन्होंने कहा कि यदि झारखंड में PESA नियमावली का वास्तविक एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है, तो ग्राम सभा को प्राकृतिक संसाधनों, विशेषकर जल, जंगल, जमीन एवं खनिज संसाधनों पर पूर्ण अधिकार एवं निर्णय लेने की वैधानिक शक्ति प्रदान की जानी चाहिए। तभी आदिवासी स्वशासन की संवैधानिक अवधारणा व्यवहारिक रूप से सशक्त हो सकेगी।
सम्मेलन में यह स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि अनुसूचित क्षेत्रों में PESA नियमावली का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव है जब पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था, पंचायत व्यवस्था एवं प्रथागत कानूनों के बीच समन्वय स्थापित कर ग्राम सभा को वास्तविक निर्णयकारी संस्था के रूप में सशक्त बनाया जाए।
सम्मेलन के अंत में सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि राज्य के सभी अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को संगठित, जागरूक एवं सक्षम बनाते हुए PESA नियमावली 2025 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि जल, जंगल, जमीन, प्राकृतिक संसाधनों तथा आदिवासी स्वशासन की संवैधानिक भावना को धरातल पर साकार किया जा सके।
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