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कोल्हान में PESA झारखंड नियमावली, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ग्राम सभा सशक्तिकरण अभियान शुरू करने का लिया गया निर्णय

38 प्रखंडों, 580 पंचायतों एवं 4,725 से अधिक ग्राम सभाओं में चरणबद्ध अभियान चलाने का सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय


जमशेदपुर, 02 अगस्त 2026

कोल्हान प्रमंडल में झारखंड PESA नियमावली, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम स्वशासन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से "PESA ग्राम सभा सशक्तिकरण एवं कार्यान्वयन कार्यक्रम – 2026" के अंतर्गत एक दिवसीय तैयारी कार्यशाला का आयोजन ट्राइबल कल्चरल सेंटर (TCC), सोनारी, जमशेदपुर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।



इस ऐतिहासिक कार्यशाला में पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम एवं सरायकेला-खरसावाँ जिलों से बड़ी संख्या में माझी बाबा, मुंडा-मानकी, परगनैत, ग्राम प्रधान, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के प्रमुख, ग्राम सभा प्रतिनिधि एवं विभिन्न आदिवासी समुदायों के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यशाला में संथाल, महली, मुण्डा, हो, भूमिज, उराँव, खड़िया, गोंड, पहाड़िया, सबर, बिरहोर, बथुडी, पुराण सहित विभिन्न आदिवासी समुदायों का प्रतिनिधित्व रहा।


कार्यशाला का उद्देश्य केवल झारखंड PESA नियमावली, 2025 की जानकारी साझा करना नहीं था, बल्कि कोल्हान क्षेत्र में ग्राम सभा गठन, ग्राम सभा सशक्तिकरण, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था और पंचायत व्यवस्था के समन्वय, प्रशिक्षण मॉडल तथा जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करना था।


बैठक में वक्ताओं ने कहा कि PESA केवल एक कानून नहीं, बल्कि अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समाज के संवैधानिक स्वशासन, जल-जंगल-जमीन, प्राकृतिक संसाधनों, संस्कृति, परंपरा और सामुदायिक अधिकारों की रक्षा का मजबूत कानूनी आधार है। यदि ग्राम सभाओं का विधिसम्मत गठन नहीं होगा, तो PESA का वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। इसलिए प्रत्येक पंचायत में ग्राम सभाओं का गठन एवं उन्हें सक्रिय बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए Shankar Sen Mahali ने कहा कि झारखंड PESA नियमावली, 2025 केवल एक प्रशासनिक नियमावली नहीं, बल्कि अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समाज के संवैधानिक स्वशासन, पारंपरिक ग्राम शासन व्यवस्था और ग्राम सभा की सर्वोच्चता को व्यवहारिक रूप से स्थापित करने का ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि PESA को समझने के लिए उसके ऐतिहासिक विकासक्रम को जानना आवश्यक है।


उन्होंने विस्तार से बताया कि आदिवासी स्वशासन की अवधारणा कोई नई व्यवस्था नहीं है। इसकी ऐतिहासिक एवं कानूनी पृष्ठभूमि विल्किन्सन नियमावली (Wilkinson's Rules), 1837 से प्रारंभ होती है, जिसने विशेष रूप से कोल्हान क्षेत्र की पारंपरिक प्रशासनिक एवं न्यायिक व्यवस्था को मान्यता प्रदान की। इसके बाद Scheduled Districts Act, 1874 के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों की विशिष्ट प्रशासनिक व्यवस्था को स्वीकार किया गया। स्वतंत्र भारत में संविधान की पाँचवीं अनुसूची ने अनुसूचित क्षेत्रों की विशेष पहचान और संरक्षण सुनिश्चित किया तथा अंततः पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA Act, 1996) के माध्यम से ग्राम सभा को स्वशासन की मूल इकाई के रूप में संवैधानिक मान्यता दी गई।


उन्होंने कहा कि इन संवैधानिक और विधिक प्रावधानों की निरंतरता में झारखंड PESA नियमावली, 2025 राज्य में PESA के व्यावहारिक क्रियान्वयन का आधार प्रदान करती है। उन्होंने उपस्थित प्रतिनिधियों को नियमावली के प्रमुख प्रावधानों, ग्राम सभा के गठन की प्रक्रिया, ग्राम सभा के अधिकार एवं दायित्व, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, सामाजिक न्याय, स्थानीय योजना निर्माण तथा पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के साथ उसके समन्वय पर विस्तार से जानकारी दी।


अपने संबोधन में उन्होंने विशेष रूप से कहा कि "ग्राम सभा केवल एक बैठक नहीं, बल्कि अनुसूचित क्षेत्रों में लोकतांत्रिक स्वशासन की सर्वोच्च संस्था है। ग्राम सभा ही स्थानीय विकास, सामाजिक न्याय, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा, सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण तथा आदिवासी संस्कृति, परंपरा और पहचान की वास्तविक संरक्षक है।"


उन्होंने आगे कहा कि यदि ग्राम सभाओं का गठन PESA नियमावली के अनुरूप नहीं किया जाता है, तो आदिवासी समाज अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रभावी उपयोग नहीं कर पाएगा। इसलिए ग्राम सभा का विधिसम्मत गठन, नियमित संचालन और क्षमता विकास समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।


उन्होंने यह भी बताया कि कोल्हान प्रमंडल के 38 प्रखंडों, 580 पंचायतों और 4,725 से अधिक ग्राम सभाओं तक चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण एवं जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है, ताकि प्रत्येक ग्राम सभा अपने अधिकारों, दायित्वों और शक्तियों से परिचित होकर स्वशासन की भावना को धरातल पर साकार कर सके।


अपने संबोधन के अंत में Shankar Sen Mahali ने सभी पारंपरिक स्वशासन प्रतिनिधियों, माझी बाबा, मुंडा-मानकी, ग्राम प्रधानों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे दलगत या व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर ग्राम सभा को सशक्त बनाने के लिए एकजुट होकर कार्य करें। उन्होंने कहा—

"ग्राम सभा का गठन केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आदिवासी स्वशासन के पुनर्स्थापन का आंदोलन है। जब तक प्रत्येक गाँव में सशक्त ग्राम सभा स्थापित नहीं होगी, तब तक PESA का उद्देश्य पूर्ण नहीं होगा। हमें अपने पूर्वजों की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के बीच एक मजबूत सेतु बनाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर भविष्य का निर्माण करना होगा।"

उन्होंने अंत में सभी प्रतिभागियों से झारखंड PESA नियमावली, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अपने-अपने क्षेत्रों में ग्राम सभा गठन, जनजागरूकता एवं प्रशिक्षण अभियान चलाने का सामूहिक आह्वान किया और कहा —

"मजबूत ग्राम सभा ही मजबूत ग्राम स्वशासन की पहचान है, और यही आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की सबसे बड़ी शक्ति है।"


कार्यशाला के दौरान ग्राम सभा सशक्तिकरण में आ रही विभिन्न चुनौतियों — जागरूकता की कमी, प्रशिक्षण का अभाव, पारंपरिक संस्थाओं एवं पंचायत व्यवस्था के बीच समन्वय, प्रशासनिक सहयोग, अभिलेख प्रबंधन तथा ग्राम सभा की नियमित बैठकों पर गंभीर एवं सार्थक चर्चा हुई। सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने क्षेत्रों के अनुभव साझा किए तथा इन चुनौतियों के समाधान हेतु झारखंड PESA नियमावली, 2025 के प्रावधानों के अनुरूप कार्य करने पर सहमति व्यक्त की।


सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि कोल्हान प्रमंडल के 38 प्रखंडों के अंतर्गत 580 पंचायतों में स्थित 4,725 से अधिक ग्राम सभाओं तक चरणबद्ध तरीके से पहुंचते हुए ग्राम सभा गठन एवं सशक्तिकरण अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए पंचायत स्तरीय प्रशिक्षण, ग्राम सभा उन्मुखीकरण, पारंपरिक स्वशासन प्रतिनिधियों का क्षमता विकास तथा ग्राम स्तर पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।


प्रतिभागियों ने यह भी निर्णय लिया कि प्रत्येक प्रखंड में स्थानीय समन्वय टीम का गठन किया जाएगा, जो पंचायत एवं ग्राम सभा स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगी तथा ग्राम सभा गठन की प्रक्रिया को गति देगी। इस अभियान के माध्यम से ग्राम सभाओं को स्थानीय योजना निर्माण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, सामाजिक न्याय, पारदर्शिता एवं सामुदायिक विकास का प्रभावी मंच बनाया जाएगा।


कार्यशाला में उपस्थित सभी पारंपरिक स्वशासन प्रतिनिधियों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में PESA झारखंड नियमावली, 2025 के अनुरूप ग्राम सभाओं के गठन, सशक्तिकरण एवं जनजागरूकता अभियान को सफल बनाने के लिए हरसंभव सहयोग देंगे तथा समाज को संगठित कर इस अभियान को जनभागीदारी का स्वरूप प्रदान करेंगे।


कार्यक्रम में SLMT के सदस्य पंचानन सोरेन, मनोज कुमार सोय, पातार जोंको, बिजय कुजूर, रवीन्द्र गिलुवा सहित तीन दर्जन से अधिक पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के प्रमुख, माझी बाबा, मुंडा-मानकी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं ग्राम सभा प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


बैठक में सर्वसम्मति से यह भी निर्णय लिया गया कि यह संपूर्ण अभियान IndigenousX Foundation और "पारंपरिक ग्राम सभा सशक्तिकरण संस्थान" के माध्यम से संचालित किया जाएगा। आगामी महीनों में कोल्हान प्रमंडल के सभी प्रखंडों एवं पंचायतों में प्रशिक्षण कार्यशालाएँ आयोजित कर ग्राम सभाओं के गठन एवं सशक्तिकरण की प्रक्रिया को गति दी जाएगी।


अंत में सभी प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया —

"ग्राम सभा का गठन ही ग्राम स्वशासन की आधारशिला है।सशक्त ग्राम सभा ही PESA के प्रभावी क्रियान्वयन, आदिवासी स्वशासन, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा संविधान प्रदत्त अधिकारों की वास्तविक गारंटी है।आइए, हम सब मिलकर कोल्हान की प्रत्येक पंचायत और प्रत्येक ग्राम सभा को सशक्त, संगठित और आत्मनिर्भर बनाएं तथा झारखंड PESA नियमावली, 2025 को धरातल पर सफलतापूर्वक लागू करें।"

🌐 IndigenousX के बारे में अधिक जानकारी के लिए नीचे 👇 दिए गए बटन पर क्लिक करें।



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