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मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा जी को श्रद्धांजलि दी गई।


आज मुसाबनी स्थित अस्पताल चौक पर मरांग गोमके Jaipal Singh Munda की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनकी जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आदिवासी समाज के अधिकार, स्वाभिमान और संवैधानिक मूल्यों के लिए उनके अतुलनीय योगदान को स्मरण किया गया। कार्यक्रम के दौरान महान समाज सुधारिका Savitribai Phule की जयंती भी मनाई गई और शिक्षा, नारी सशक्तिकरण, सामाजिक समानता तथा कुरीतियों के विरुद्ध उनके ऐतिहासिक संघर्ष को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह संयुक्त आयोजन सामाजिक चेतना, समता और न्याय के मूल विचारों को मजबूती देने वाला रहा।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के उपरांत Dak Bangla में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी 21–22 मार्च को प्रस्तावित सम्मेलन की व्यापक तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। सम्मेलन के उद्देश्य, आयोजन की रूपरेखा, जनसहभागिता, जिम्मेदारियों का निर्धारण, प्रचार-प्रसार तथा समन्वय व्यवस्था जैसे विषयों पर ठोस विचार-विमर्श किया गया। सभी उपस्थित सदस्यों ने एकजुट होकर सम्मेलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।

बैठक का एक प्रमुख एजेंडा 2 जनवरी 2026 को जारी PESA नियमावली पर विस्तृत चर्चा रहा। सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों ने नियमावली का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला कदम बताया। चर्चा में यह स्पष्ट किया गया कि PESA नियमावली के माध्यम से झारखंड के सभी 5वीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्राम सभा को कानूनी मान्यता और वास्तविक अधिकार प्राप्त होंगे। इससे पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को संवैधानिक संरक्षण मिलेगा और निर्णय प्रक्रिया में स्थानीय समुदाय की निर्णायक भूमिका सुनिश्चित होगी।


बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रत्येक गाँव में ग्राम सभा के अंतर्गत ग्राम समितियों का गठन किया जाएगा, ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन, संसाधनों का संरक्षण, सामाजिक न्याय और विकास से जुड़े निर्णय स्थानीय स्तर पर पारदर्शी ढंग से लिए जा सकें। वक्ताओं ने कहा कि ग्राम सभा का सशक्तिकरण ही आदिवासी समाज की आत्मनिर्भरता, सम्मान और सुरक्षा की आधारशिला है।


इस कार्यक्रम में झारखंड पोनोत माझी बुधेश्वर मार्डी, पोनोत जोग माझी शंकर सेन महाली, पूर्वी सिंहभूम तोरोप परगना सोबरा हेम्ब्रम, झारखंड फाइटर सुराई बास्के, संजीवन पातर, बिड़ू सोरेन, सकला मार्डी, प्रियोनाथ बास्के, मो. गुलाम, संजय बेहरा, मंगल मार्डी, विकास हेम्ब्रम, गोविंद बेहरा सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और बुद्धिजीवी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।


समापन पर सभी ने मरांग गोमके जइपाल सिंह मुंडा और सावित्रीबाई फुले के विचारों को आत्मसात करते हुए आदिवासी स्वशासन, सामाजिक समानता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर कार्य करने का संकल्प लिया। यह कार्यक्रम विचार, चेतना और संघर्ष की साझा दिशा को मजबूत करने वाला सिद्ध हुआ। जोहार।

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