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माझी माडवा, बामनघाटी सम्मेलन

अपडेट करने की तारीख: 6 दिन पहले

ओडिशा | माझी माडवा, बामनघाटी उप - संभाग राष्ट्रीय सम्मेलन (24 जनवरी 2026)

कार्यक्रम की शुरुआत अत्यंत श्रद्धा और गरिमा के साथ की गई। इस अवसर पर झारखंड पोनोत परगना बाबा नंदलाल माहली, माझी बाबा बुधेश्वर मार्डी, जोग माझी बाबा शंकर सेन महाली, हरि नारायण महली, हरि शंकर महली, बादल महली, मनोज तिर्की, निरंजन बगवार, रमेश माहली एवं बिसुन महली जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।

सभी ने एक साथ पारसी जितकारिया पंडित Raghunath Murmu जी की आदमकद प्रतिमा पर विधिवत पूजा-अर्चना एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

यह शुभारंभ महाली समाज की एकता, सांस्कृतिक चेतना और आत्मसम्मान का प्रतीक बना, जिसने पूरे सम्मेलन को सकारात्मक ऊर्जा, अनुशासन और सामूहिक संकल्प की भावना से ओत-प्रोत कर दिया।


कार्यक्रम के दौरान महाली समाज की समृद्ध परंपरा और सांस्कृतिक गरिमा का पालन करते हुए सभी सम्माननीय अतिथियों को पारंपरिक पगड़ी पहनाकर एवं पुष्पगुच्छ देकर भव्य स्वागत कर सम्मान किया गया।


ओडिशा के माझी माडवा, बामनघाटी उप-संभाग में महाली समाज का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य महाली समाज की एकता को सशक्त करना, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करना और समाज के समग्र विकास के लिए ठोस रणनीति तय करना था।

सम्मेलन में माझी - मांडवा, Adim Mahali Mahal (पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था), Mahli Janjati Vikas Manch, तथा All Mahli Employee Welfare Trust (रांची) जैसे प्रमुख संगठनों की सक्रिय सहभागिता रही। इसके साथ ही Adim Mahali Mahal West Bengal से आए प्रतिनिधिमंडल ने भी सम्मेलन को विशेष मजबूती प्रदान की।


इस सम्मेलन का मुख्य एजेंडा:

Mahali Community Development & Growth पर केन्द्रित रहा।


1. राष्ट्रीय स्तर के महाली संगठन का गठन

देश के सभी राज्यों में बसे महाली समाज को एक साझा राष्ट्रीय मंच पर लाने, समन्वय बढ़ाने और सामूहिक आवाज को मजबूती देने पर विस्तार से चर्चा हुई।


2. महाली पारंपरिक संस्कृति का संरक्षण

महाली समाज की परंपराएं, पहचान, भाषा और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित व प्रोत्साहित करने हेतु ठोस पहल पर सहमति बनी, ताकि विलुप्ति की कगार पर खड़ी परंपराओं को पुनर्जीवित किया जा सके।


3. प्रथागत कानूनों का दस्तावेजीकरण

जन्म, विवाह, मृत्यु संस्कार तथा सामाजिक रीति-रिवाजों से जुड़े महाली प्रथागत कानूनों को लिखित व मानकीकृत रूप देने पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ।


4. विकास एवं विकास-योजना (Action Plan)

शिक्षा, रोजगार, आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और समुदाय सशक्तिकरण के लिए एक संरचित रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी।


5. राज्य-वार स्थिति रिपोर्ट पर चर्चा

विभिन्न राज्यों में महाली समाज की वर्तमान स्थिति, चुनौतियां और प्रगति पर प्रस्तुतियां दी गईं और समाधान-केंद्रित चर्चा हुई।


6. अन्य महत्वपूर्ण विषय (AOB)

समुदाय के उत्थान से जुड़े अतिरिक्त प्रस्तावों और सुझावों पर खुला संवाद हुआ।



विचार – विमर्श एवं सामूहिक संकल्प

सम्मेलन में उपस्थित सभी सदस्यों ने बारी-बारी से अपने विचार रखे और महाली समाज के वर्तमान व भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर चर्चा की।


  • एकता का सशक्त संदेश

पूर्वी सिंहभूम क्षेत्र के तोरोप परगना बाबा शोबरा हेम्ब्रम जी ने अपने ओजस्वी संबोधन में झारखंड, ओडिशा, बंगाल, बिहार एवं अन्य राज्यों में निवास कर रहे महली समुदाय को एक माला के सूत्र में पिरोने का सशक्त संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि यदि हमें अपनी पहचान, अस्तित्व और सामाजिक सम्मान को सुरक्षित रखना है, तो सभी राज्यों को आपसी मतभेद भुलाकर मिल-जुलकर संगठित रूप से कार्य करना होगा। उनका यह आह्वान समाज में नई चेतना, एकता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना जागृत करने वाला रहा, जिसे उपस्थित सभी सदस्यों ने गहराई से आत्मसात किया।


वासुदेव मार्डी जी ने अपने संबोधन में सरल और स्पष्ट शब्दों में महाली समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक विभिन्न पहलुओं को सम्मेलन में उपस्थित सभी लोगों के साथ साझा किया। उनकी बातों में अनुभव, व्यवहारिक दृष्टिकोण और समाजहित की स्पष्ट झलक दिखाई दी, जिसे सभी ने गंभीरता और गहराई से सुना और समझा।

सभी उपस्थित सदस्यों ने एक स्वर में यह आश्वासन दिया कि अब समय आ गया है जब प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक गांव में महाली समुदाय के बीच एकता और एकरूपता को मजबूत किया जाए। इसके लिए सामूहिक प्रयास, आपसी सहयोग और साझा मंच पर आना अनिवार्य है —ताकि समाज को संगठित, सशक्त और समृद्ध दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।


आदिम महाली महल झारखंड पोनोत के गोडेट बाबा देवनाथ बेसरा जी ने सम्मेलन में छह बिंदुओं पर आधारित सचिवीय एजेंडा को क्रमबद्ध एवं विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रत्येक बिंदु की व्याख्या करते हुए उसके उद्देश्य, महत्व और व्यावहारिक क्रियान्वयन की दिशा पर प्रकाश डाला, जिससे उपस्थित प्रतिनिधियों को समाज के भावी कार्य-दिशा की स्पष्ट समझ मिली।

इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न राज्यों में महली समाज के भीतर पाई जाने वाली विविधताओं पर भी गहन दृष्टि डाली और कहा कि इन विविधताओं को कमजोरी नहीं, बल्कि समृद्धि के रूप में स्वीकार करते हुए हमें उनके बीच एकरूपता और समन्वय स्थापित करना होगा। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि हम संगठित होकर एक साझा मंच पर आएं और महली समाज को एक मजबूत, जागरूक और सशक्त पहचान प्रदान करें।



बादल महाली ने अपने संबोधन में कहा—

All Mahli Employee Welfare Trust के गठन की आवश्यकता इसलिए पड़ी, क्योंकि आज भी नौकरी के दौरान आदिवासी कर्मचारियों को अनेक प्रकार के भेदभाव और अन्याय का सामना करना पड़ता है। ऐसे में एक सशक्त मंच होना अत्यंत जरूरी है, जो आदिवासी कर्मचारियों की समस्याओं को संगठित रूप से उठाए और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए।


उन्होंने आदिवासी समाज को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए बताया कि हम SC/ST आरक्षण नीति पर निरंतर कार्य कर रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश बहुत से लोग रिज़र्वेशन रोस्टर सिस्टम को ठीक से नहीं समझते। साथ ही सरकार द्वारा दिए गए विशेषाधिकार (Privileges Granted), ग्रुप-A पदों में मिलने वाली छूट (Relaxation) तथा अन्य सुविधाओं की जानकारी का भी अभाव है।


उन्होंने यह भी कहा कि कई लोग डर या जानकारी के अभाव में RTI दाखिल नहीं करते, जिसके कारण उनके अधिकारों का हनन होता रहता है। इसलिए जरूरी है कि महली समाज के लोग संगठित होकर अपने अधिकारों को समझें, उनका उपयोग करें और किसी भी प्रकार के भेदभाव के विरुद्ध साहसपूर्वक आवाज उठाएं।


उनका संबोधन समाज को जागरूक करने वाला, प्रेरणादायक और अधिकार-आधारित चेतना से परिपूर्ण रहा।


उन्होंने ने आदिम महाली महल तथा आयोजन समिति माझी माडवा की सराहना करते हुए उनके सतत प्रयासों की प्रशंसनीय भूमिका को रेखांकित किया। साथ ही अपने संगठन की ओर से महली समुदाय के जीवन, संस्कृति और संघर्ष पर आधारित एक सुंदर पिक्चर आर्ट भेंट कर अपना हार्दिक आभार प्रकट किया।

यह भावपूर्ण क्षण आपसी सम्मान, सहयोग और सामाजिक एकता का प्रतीक रहा, जिसने सम्मेलन की गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान की।


संगीता तिर्की ने अपने संबोधन में कहा—

महली समाज की वास्तविक ताकत उसकी एकता और संगठन में निहित है। जब तक हम सभी एक-दूसरे से जुड़कर, एक मंच पर आकर कार्य नहीं करेंगे, तब तक समाज का समग्र विकास संभव नहीं है। हमें अपनी पारंपरिक संस्कृति, पहचान और मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी लेनी होगी। शिक्षा, जागरूकता और सामूहिक प्रयास के माध्यम से ही हम महली समाज को एक सशक्त, आत्मनिर्भर और सम्मानित पहचान दिला सकते हैं।


इस सम्मेलन में लिए गए निष्कर्ष

  • महाली समाज की एकता, एकरूपता और समृद्धि पर सभी वक्ताओं ने जोर दिया।


  • समाज के सामने मौजूद विभिन्न चुनौतियों पर ईमानदार और व्यावहारिक चर्चा हुई।


  • सभी प्रतिनिधियों ने एक मंच पर आने और सामूहिक रूप से आगे बढ़ने के लिए पूर्ण समर्थन व्यक्त किया।


  • भविष्य में भी ऐसे राष्ट्रीय सम्मेलन निरंतर आयोजित करने तथा आपसी सहयोग बनाए रखने पर सर्वसम्मति बनी।


यह सम्मेलन महाली समाज के लिए दिशा-निर्धारक कदम साबित हुआ, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर संगठन, सांस्कृतिक संरक्षण और विकासात्मक एजेंडे को आगे बढ़ाने की ठोस नींव रखी।


🌐 Adim Mahali Mahal के बारे में अधिक जानकारी/पंजीकरण/संपर्क करने के लिए नीचे 👇 दिए गए लिंक पर क्लिक करें।



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