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दुमका दिसोम सोहराय परब 2026 में आदिम माहली महाल का गरिमामयी प्रतिनिधित्व

दुमका स्थित S.P. College मैदान में आयोजित दिसोम सोहराय परब 2026 के पावन अवसर पर आदिवासी संस्कृति, परंपरा और एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। यह पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति पूजा, सामुदायिक समरसता और आदिवासी अस्मिता का जीवंत प्रतीक है।


इस ऐतिहासिक आयोजन में आदिम माहली महाल की ओर से भी गरिमामयी सहभागिता दर्ज की गई, जहाँ झारखंड पोनोत माझी बाबा श्री बुधेश्वर मार्डी जी एवं पोनोत जोग माझी बाबा श्री शंकर सेन माहली जी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में अपनी सम्मानजनक उपस्थिति देकर परब की गरिमा को और ऊँचाई प्रदान की।


इस परब में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री श्री चम्पाई सोरेन जी, सिद्धो-कान्हू वंशज श्री मंडल मुर्मू जी, तथा

कटोरिया विधायक श्री पुरन लाल टुडू जी का संक्षिप्त संबोधन संदेश


बिहार के कटोरिया विधायक श्री पुरन लाल टुडू जी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे।

कटोरिया विधायक श्री पुरन लाल टुडू जी के साथ खास मुलाकात में बिहार में रह रहे आदिवासी समाज के संवैधानिक एवं सामाजिक अधिकारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण चर्चा की गई। इस दौरान विशेष रूप से ग्राम सभा की भूमिका, शक्तियों और अधिकारों पर विस्तार से संवाद हुआ तथा यह भी स्पष्ट किया गया कि बिहार में आदिवासी समाज को अभी और अधिक जागरूक करने की आवश्यकता है, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग होकर संगठित रूप से आगे बढ़ सकें। इसी उद्देश्य के तहत जल्द ही बिहार में भी आदिवासियों को संवैधानिक व सामाजिक प्रशिक्षण प्रदान करते हुए एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई गई है। साथ ही बिहार में आदिवासी समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए माझी–आरी (परंपरागत स्वशासन प्रणाली) को सशक्त करने पर भी सहमति बनी, जिस पर विधायक श्री पुरन लाल टुडू जी ने सकारात्मक समर्थन देते हुए अपनी सहमति व्यक्त की। यह चर्चा बिहार के आदिवासी समाज के संगठन, अधिकार-संरक्षण तथा पारंपरिक व्यवस्था के पुनर्जीवन की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पहल मानी जा रही है। आदिम माहली महाल के दोनों वरिष्ठ प्रतिनिधियों की उपस्थिति समाज के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय बनी।


मुख्य अतिथि श्री चम्पाई सोरेन जी ने अपने संबोधन में सोहराय परब के ऐतिहासिक महत्व, आदिवासी परंपरा की गहराई और प्रकृति के साथ आदिवासी जीवन-दर्शन पर अत्यंत महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने PESA अधिनियम को लेकर भी अपनी स्पष्ट एवं सार्थक टिप्पणी प्रस्तुत करते हुए ग्रामसभा की शक्ति, स्वशासन की अवधारणा तथा जल-जंगल-जमीन की रक्षा जैसे मुद्दों पर आदिवासी समाज को सजग रहने का संदेश दिया।


पूरे आयोजन में सभी अतिथियों का स्वागत अत्यंत भव्य रूप से किया गया और हर वक्ता के संदेश में सोहराय पर्व की गरिमा, आदिवासी समाज की एकता तथा संस्कृति-संरक्षण की भावना स्पष्ट झलकती रही।


कार्यक्रम का सबसे आकर्षक दृश्य वह रहा जब पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवा-युवतियाँ नगाड़ों की थाप, पारंपरिक संगीत और लोकनृत्य के साथ पूरे मैदान को ऊर्जा और उत्साह से भरते हुए झूम उठे। एक ओर जहाँ परंपरा की सुगंध थी, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी का जोश और गौरव दिखा, जिसने साबित कर दिया कि हमारी संस्कृति आज भी मजबूत है और निरंतर आगे बढ़ रही है।


दिसोम सोहराय परब 2026 ने यह संदेश दिया कि परंपरा हमारी शक्ति है, संस्कृति हमारी पहचान है और एकता हमारा भविष्य है।


जय जोहार!

सोहराय परब की हार्दिक शुभकामनाएँ!

आदिवासी एकता ज़िंदाबाद!



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