
आदिवासी आत्ममंथन शिविर का सफ़ल आयोजन
आदिवासी आत्ममंथन शिविर–2026 (Part–I) का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया, जिसमें आदिवासी समाज के सामाजिक, संवैधानिक, ग्राम सभा, PESA, रोजगार एवं स्वरोजगार, जल-जंगल-जमीन तथा सांस्कृतिक संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर, सार्थक एवं समाधानपरक चर्चा हुई। कार्यक्रम में विशेष रूप से ग्राम सभा की व्यावहारिक चुनौतियों, PESA नियमावली के क्रियान्वयन एवं पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण विचार, अनुभव और सुझाव सामने आए। कार्यक्रम में
राणा प्रताप उराँव,
( President, Parha Samanway Parishad; Ex– Dy. Commissioner of Commercial Taxes )

S S Mahali,
Jog Majhi - Jharkhand Ponot
Adim Mahali Mahal
Panchanan Soren
General Secretary - PGSSS,
(SLMT- PESA, Ex– Banker)
Sanjeev Bhagat
President - Paramparik Gram Sabha Sasaktikaran Sansthan, SLMT- PESA,(Chairman- Nour Punp Trust)
Manoj Kumar Soy
(State Level Master Trainer - PESA, Department of Panchayati Raj , Jharkhand)
L.m. Oraon
(Org. Secretary cum Spokesperson, Parha Samanway Parishad; Ex Manager, SBI)
Parmeshwar Bhagat
(Vice President, Parha Samanway Parishad; Ex – D D C) एवं
रामचंद्र उराँव
(Team Dhumkuria; Professor- National Law University Ranchi)
सहित अन्य वक्ताओं ने अपने-अपने विषयों पर महत्वपूर्ण विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का मूल उद्देश्य आत्ममंथन → संवाद → चुनौतियों की पहचान → समाधान → कार्ययोजना → जिम्मेदारी → क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ना रहा।
इस शिविर में प्रमुख रूप से चर्चा की गई —
🔹 आदिवासी समाज
• ऐतिहासिक विरासत एवं संघर्ष
• वर्तमान चुनौतियाँ
• आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास का विज़न
🔹 रोजगार एवं नियोजन
• स्थानिक (Local) नीति
• नियोजन (Employment) नीति
• स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
🔹 स्वरोजगार एवं उद्यमिता
• व्यवसाय एवं लघु उद्योग
• वनोपज आधारित आजीविका
• आत्मनिर्भर आदिवासी अर्थव्यवस्था
🔹 ग्राम सभा का धरातल पर क्रियान्वयन
• PESA अधिनियम एवं PESA नियमावली, 2025
• ग्राम सभा के अधिकार एवं शक्तियाँ
• पारंपरिक स्वशासन एवं संवैधानिक व्यवस्था
🔹 आबुवा दिसुम – आबुवा राज
• संविधान की पाँचवीं अनुसूची
• जल, जंगल, जमीन पर सामुदायिक अधिकार
• ग्राम सभा आधारित सुशासन
🔹 नया रास्ता – नया झारखंड
• शिक्षा, कौशल एवं नेतृत्व
• तकनीक, नवाचार और युवाओं की भूमिका
• सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण

इसी क्रम में “पाँचवीं अनुसूची एवं आदिवासी अधिकार” विषय पर S. S. Mahali ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का संविधान आदिवासी समाज की विशिष्ट सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष संवैधानिक व्यवस्थाएँ प्रदान करता है, जिनमें पाँचवीं अनुसूची एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि केवल पाँचवीं अनुसूची के बारे में जानना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह समझना आवश्यक है कि इसका हमारे गाँव, हमारी ग्राम सभा और हमारे दैनिक जीवन से क्या संबंध है। क्या समुदाय को अपने संवैधानिक अधिकारों की पूरी जानकारी है? क्या अनुसूचित क्षेत्रों में संवैधानिक प्रावधानों की भावना के अनुरूप शासन एवं विकास हो रहा है? क्या ग्राम सभा को उसकी उचित भूमिका मिल रही है? उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संविधान को केवल किताब में पढ़ने के बजाय उसे अपने गाँव की व्यवस्था और जीवन से जोड़कर समझना होगा। अधिकार तभी प्रभावी होते हैं जब समाज को उनके बारे में जानकारी हो, समाज संगठित हो और संवैधानिक व्यवस्था के भीतर उनका उपयोग करना जानता हो।

उन्होंने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता जैसे संवैधानिक मूल्यों को ग्राम सभा और सामुदायिक जीवन में व्यवहारिक रूप से लागू करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनकी बात का सार यह रहा कि संविधान की जानकारी से अधिकारों की समझ, अधिकारों की समझ से ग्राम सभा की मजबूती, ग्राम सभा की मजबूती से सामुदायिक भागीदारी और सामुदायिक भागीदारी से अधिकारों का प्रभावी उपयोग संभव है। उन्होंने आत्ममंथन के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न रखा कि “जो अधिकार हमें प्राप्त हैं, उनकी वास्तविक स्थिति हमारे गाँव में क्या है?” इसी सवाल के माध्यम से उन्होंने अधिकारों की जानकारी से आगे बढ़कर उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन की दिशा में सामूहिक प्रयास की आवश्यकता बताई।
इस महत्वपूर्ण आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी वक्ताओं, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के प्रमुखों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों, युवाओं, अतिथियों एवं सहयोगियों का हृदय से आभार। सभी की सहभागिता और विचारों ने इस सामूहिक आत्ममंथन को सार्थक बनाया। “कल क्या था • आज क्या है • कल क्या होगा?” — इसी चिंतन के साथ आत्ममंथन से आत्मनिर्भरता की ओर, संगठित समाज, सशक्त ग्राम सभा और समृद्ध आदिवासी भविष्य की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम रहा।

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S S Mahali 🎯
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