
सालकागढ़िया गांव में पेसा नियमावली 2025 के तहत ग्राम सभा का गठन
- S S Mahali

- 3 दिन पहले
- 2 मिनट पठन
आज चाकुलिया प्रखंड अंतर्गत सालकागढ़िया गांव में पेसा नियमावली 2025 के तहत एक महत्वपूर्ण ग्राम सभा का आयोजन किया गया, जिसमें विधिवत रूप से ग्राम सभा का गठन संपन्न हुआ। यह पहल आदिवासी स्वशासन व्यवस्था को सशक्त बनाने एवं संविधान प्रदत्त अधिकारों को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

ग्राम सभा गठन के दौरान सर्वसम्मति से पारंपरिक माझी बाबा सुपाई चंद्र हांसदा को ग्राम सभा अध्यक्ष, सालखान हेंब्रम को सहायक सचिव तथा जयंती सोरेन को कोषाध्यक्ष के रूप में चयनित किया गया। इसके साथ ही ग्राम के समग्र विकास, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन, सामाजिक न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए पेसा नियमावली के अनुरूप विभिन्न समितियों का भी गठन किया गया, ताकि ग्राम स्तर पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

इस अवसर पर राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर पंचानन सोरेन ने पेसा नियमावली 2025 के प्रावधानों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डालते हुए ग्राम सभा के अधिकार, दायित्व एवं कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि पेसा नियमावली का उद्देश्य ग्राम सभा को निर्णय लेने की केंद्रीय इकाई बनाना है, जिससे गांव का विकास स्थानीय स्तर पर, पारदर्शिता एवं सहभागिता के साथ सुनिश्चित हो सके।

साथ ही पेसा कानून के जानकार शंकर सेन महाली ने 5वीं अनुसूची के संवैधानिक प्रावधानों, पेसा अधिनियम की विशेषताओं तथा आदिवासी समुदायों को प्रदत्त अधिकारों के बारे में विस्तृत जानकारी सभा को दी। उन्होंने बताया कि 5वीं अनुसूची क्षेत्र में ग्राम सभा को विशेष अधिकार प्राप्त हैं, जिसके माध्यम से जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के साथ-साथ पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

सभा में गांव के पारंपरिक प्रमुखों—माझी बाबा, परगना बाबा, गोडेत बाबा, नायके बाबा एवं पाराणिक बाबा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी उपस्थित लोगों ने ग्राम सभा को सशक्त बनाने एवं पेसा नियमावली को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करने का संकल्प लिया।
अंततः यह ग्राम सभा सालकागढ़िया गांव में स्वशासन, सामुदायिक सहभागिता एवं अधिकार आधारित विकास की दिशा में एक मजबूत पहल के रूप में उभर कर सामने आई है।
इस बैठक में तोरोप परगना डॉ. अर्जुन टुडू, माझी बाबा शंखाभंगा मिहिराम सोरेन, पीड़ परगना लूसा मुर्मू सहित कई माझी बाबा एवं पारंपरिक प्रमुख उपस्थित रहे। साथ ही सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष एवं बुजुर्गों की सक्रिय और उत्साहपूर्ण भागीदारी रही, जिन्होंने ग्राम सभा को सशक्त बनाने और पेसा नियमावली को प्रभावी ढंग से लागू करने का संकल्प लिया।
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