
पुखुरिया ग्राम सभा को जागरूक कर सशक्त बनाया गया
- S S Mahali

- 3 दिन पहले
- 4 मिनट पठन
अपडेट करने की तारीख: 2 दिन पहले


आज दिनांक 10 मई 2026 को पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत धालभूमगढ़ प्रखंड के पुखुरिया गांव में IndigenousX एवं Paramparik Gram Sabha Sashaktikaran Sansthan के संयुक्त तत्वावधान में ग्राम सभा सशक्तिकरण एवं संवैधानिक जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम GAP–FILL (Generation Avoided Power – Fundamental Information & Legal Literacy) परियोजना के तहत IndigenousX के द्वारा आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समुदाय, ग्राम सभा के सदस्यों, युवाओं एवं महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था, ग्राम सभा की शक्तियों तथा जल–जंगल–जमीन की सामुदायिक सुरक्षा एवं संरक्षण के प्रति जागरूक और संगठित करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता गांव के पारंपरिक Majhi Baba श्री मेगराय मांडी द्वारा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा, महिलाएं एवं सामाजिक कार्यकर्ता सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को विस्तारपूर्वक बताया गया कि ग्राम सभा केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि गांव की सामूहिक शक्ति, पहचान, लोकतांत्रिक भागीदारी और आत्मनिर्णय का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। ग्राम सभा गांव की आत्मा है, जिसके माध्यम से ग्रामीण अपने प्राकृतिक संसाधनों, सामाजिक व्यवस्था, सांस्कृतिक परंपराओं तथा विकास से जुड़े निर्णय स्वयं लेने की क्षमता रखते हैं। उपस्थित लोगों को भारतीय संविधान के पाँचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्राम सभा की भूमिका, PESA कानून 1996, PESA Regulations 2025, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था, सामुदायिक अधिकार, सामाजिक न्याय तथा स्थानीय भागीदारी आधारित विकास प्रक्रिया के बारे में सरल एवं प्रभावशाली तरीके से जानकारी दी गई। विशेष रूप से यह समझाया गया कि ग्राम सभा की सक्रियता और एकजुटता ही गांव को शोषण, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और सामाजिक विघटन से बचाने की सबसे बड़ी शक्ति है।

बैठक के दौरान SLMT पंचानन सोरेन ने PESA नियमावली 2025 के विभिन्न निगमों पर विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि ग्राम सभा आदिवासी स्वशासन व्यवस्था की मूल शक्ति है। उन्होंने ग्राम कोष (Gram Kosh), प्राकृतिक संसाधनों पर ग्राम सभा के अधिकार, स्थानीय निर्णय प्रक्रिया, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा तथा ग्राम स्तर पर सामुदायिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ग्रामीणों को जागरूक किया।

इसके साथ ही PGSS संस्थान के सदस्य विजय कुजूर ने अपने संबोधन में कहा कि PESA कानून और पाँचवीं अनुसूची केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अस्तित्व, स्वाभिमान और पारंपरिक अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा हैं। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे ग्राम सभा को मजबूत बनाने के लिए संगठित हों तथा गांव के विकास, संसाधनों और सामाजिक व्यवस्था से जुड़े निर्णय सामूहिक रूप से लें। उन्होंने कहा कि जब ग्राम सभा जागरूक और सक्रिय होगी, तभी गांव आत्मनिर्भर, संगठित और सुरक्षित बन सकेगा। विजय कुजूर ने युवाओं और महिलाओं की भागीदारी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समाज में वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है, जब नई पीढ़ी संवैधानिक अधिकारों, संस्कृति और स्वशासन व्यवस्था को समझकर नेतृत्व की भूमिका निभाए। उन्होंने यह भी कहा कि जल, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और जीवन का आधार हैं, जिसकी रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के दौरान मैंने स्वयं ग्रामीणों के बीच पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं संवैधानिक पृष्ठभूमि पर चर्चा करते हुए यह समझाने का प्रयास किया कि पाँचवीं अनुसूची केवल एक आदिवासी बहुल क्षेत्र नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की अस्मिता, स्वशासन और अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा है। आज आवश्यकता इस बात की है कि गांव-गांव में संवैधानिक जागरूकता पहुँचे और लोग अपने अधिकारों को समझते हुए संगठित रूप से ग्राम सभा को मजबूत करना हैं। ग्रामीणों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाते हुए अपने विचार, समस्याएं और अनुभव साझा किए। शिक्षा, रोजगार, भूमि अधिकार, सरकारी योजनाओं की जानकारी, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे विषयों पर सामूहिक चर्चा की गई।

इस संवाद के दौरान ग्रामीणों में काफी उत्साह, जागरूकता और सहभागिता देखने को मिली। लोगों ने PESA कानून, ग्राम सभा की शक्तियों तथा पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र के अधिकारों को लेकर अनेक प्रश्न पूछे और अपनी सहभागिता दर्ज कराई। यह स्पष्ट रूप से महसूस हुआ कि यदि सही जानकारी गांव तक पहुँचे, तो आदिवासी समाज अपने अधिकारों, परंपराओं और स्वशासन व्यवस्था को और अधिक मजबूत बना सकता है। आदिवासी समाज पीढ़ियों से अपनी शक्तियों को नजरंदाज किया है, जिस कारण से एक खाई (GAP) बन गई हैं जिसे आधारभूत जानकारी और कानूनी साक्षर के माध्यम से पाटना (FILL) करना है। GAP – FILL परियोजना का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों के भीतर आत्मविश्वास, नेतृत्व, संवैधानिक चेतना और सामुदायिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल गांवों में जागरूक, संगठित और अधिकार-संपन्न समाज निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और स्वशासन की रक्षा के लिए संवैधानिक जागरूकता ही सबसे बड़ी शक्ति है।
सशक्त ग्राम सभा — सुरक्षित जल, जंगल, जमीन और मजबूत भविष्य की आधारशिला है।
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