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आदिवासी महिला के थाना में मारा गया के प्रकरण में दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आदिवासी समाज ने एसपी से की मुलाकात

  • लेखक की तस्वीर: S S Mahali
    S S Mahali
  • 3 दिन पहले
  • 5 मिनट पठन

सरायकेला-खरसावां, 17 जून 2026।


दिनांक 15 जून 2026 को कपाली ओपी में आदिवासी युवती के साथ जान से मारने की नीयत से किया गया मारपीट एवं अमानवीय व्यवहार के आरोपों को लेकर आदिवासी समाज में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

इसी क्रम में आज पीड़ित परिवार एवं विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुलिस अधीक्षक, सरायकेला-खरसावां, निशिता द्विवेदी (IPS) से कार्यालय में मुलाकात कर मामले में त्वरित एवं प्रभावी कानूनी कार्रवाई की मांग की।

S S Mahali ने पुलिस अधीक्षक को अवगत कराया कि घटना को कई दिन बीत जाने के बावजूद अब तक दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं की गई है। केवल विभागीय कार्रवाई अथवा निलंबन जैसी प्रक्रियाओं को पर्याप्त नहीं माना जा सकता। आदिवासी समाज का मानना है कि यदि किसी सामान्य आदिवासी युवक या युवती पर आरोप लगता है तो पुलिस त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी कर न्यायिक हिरासत में भेज देती है।


किंतु जब आरोप स्वयं पुलिसकर्मियों पर लगते हैं तो कार्रवाई की गति अत्यंत धीमी दिखाई देती है। इससे आम जनता में यह संदेश जाता है कि कानून का व्यवहार सभी के लिए समान नहीं है।

S S Mahali ने कहा कि घटना के संबंध में पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं। हम केवल विभागीय कार्यवाही से संतुस्ट नही है, जल्द से जल्द दोसी पुलिसकर्मियों की गिरफ़्तारी होनी चाहिये, एक आदिवासी महिला को पूछताछ के नाम पर थाने बुलाकर उसके साथ थाना में इस तरह से जान से मारने की नियत से मारपीट की गई है, तो यह केवल एक व्यक्ति के साथ अन्याय का मामला नहीं, बल्कि संविधान, कानून और मानवाधिकारों के उल्लंघन का विषय है। ऐसे मामलों में केवल विभागीय जांच या निलंबन पर्याप्त नहीं हो सकता, बल्कि इस आपराध के लिए दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करना अति आवश्यक है।


S S Mahali ने यह भी कहा कि घटना के पश्चात अब तक दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं होना कहीं न कहीं यह संदेह उत्पन्न करता है कि उन्हें जिला प्रशासन से संरक्षण प्राप्त है। आदिवासी समाज इस प्रकार की देरी को गंभीरता से देख रहा है। पीड़ित परिवार और आदिवासी समाज का कहना है कि इस तरह के गंभीर अपराधों में न्याय में अनावश्यक विलंब से पीड़ित परिवार का विश्वास कमजोर होता है और कानून व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न ❓खड़े होते हैं।


पीड़िता के परिजन राहुल माहली, अंबालिका माहली तथा अन्य परिजनों ने भी पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि पीड़िता अभी भी अस्पताल में उपचाराधीन है और शारीरिक एवं मानसिक रूप से गंभीर स्थिति से गुजर रही है। ऐसे समय में प्रशासन की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है कि वह निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कानून के दायरे में लाए।


घटना की जानकारी प्राप्त होते ही दिनांक 15 जून 2026 से ही S S Mahali के नेतृत्व में प्रशिक्षित THL (Tribal Human Leadership) से जुड़े सामाजिक नेतृत्वकर्ताओं एवं सहयोगियों द्वारा मामले को गंभीरता से लिया गया। प्रारंभिक स्तर पर ही पीड़ित परिवार से संपर्क स्थापित कर घटना की वस्तुस्थिति जानने का प्रयास किया गया तथा पीड़ित परिवार को हरसंभव सामाजिक, नैतिक एवं कानूनी सहयोग प्रदान किया जाने लगा।


इस क्रम में सुदामा हेम्ब्रम प्रशिक्षित सामाजिक नेतृत्वकर्ताओं एवं उनके सहयोगियों, रविन्द्र सिंह सरदार और उनके सहयोगी, दिनकर कछप सहित क्षेत्र में जाकर मामले की जानकारी एकत्रित की तथा आदिवासी समाज को इस घटना से अवगत कराया। प्रतिनिधियों ने पीड़िता एवं उसके परिजनों से मुलाकात कर उनकी स्थिति का जायजा लिया तथा मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित करने की मांग उठाई।


सामाजिक नेतृत्वकर्ताओं ने प्रारंभ से ही प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न उठाए। उनका कहना था कि यदि किसी आदिवासी महिला के साथ पुलिस परिसर में इस प्रकार की घटना घटित होने के आरोप लगाए जा रहे हैं, तो मामले में तत्काल और पारदर्शी कार्रवाई होनी चाहिए थी। घटना के बाद अपेक्षित गति से कानूनी कार्रवाई नहीं होने के कारण समाज में कई प्रकार की आशंकाएं उत्पन्न हुईं, जिसे लेकर सामाजिक संगठनों ने अपनी चिंता व्यक्त की।


S S Mahali एवं उनकी टीम ने लगातार अस्पताल, पीड़ित परिवार और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया। टीम द्वारा पीड़िता की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकतानुसार कानूनी सहायता, दस्तावेजीकरण और सामाजिक समर्थन उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही, विभिन्न सामाजिक संगठनों, पारंपरिक आदिवासी स्वशासन संस्थाओं एवं समुदाय के वरिष्ठजनों को भी मामले की जानकारी देकर न्याय की मांग को संगठित रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है।

आदिवासी समाज के नेतृत्वकर्ताओं का मानना है कि किसी भी पीड़ित परिवार को न्याय की लड़ाई अकेले नहीं लड़नी चाहिए। इसी भावना के साथ S S Mahali के नेतृत्व में सामाजिक कार्यकर्ताओं की टीम घटना के प्रथम दिन से ही पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है और निष्पक्ष जांच, दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई तथा पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।


आज के प्रतिनिधिमंडल में शंकर सेन माहली (जोग माझी, आदिम माहली महाल), दिनकर कच्छप (अध्यक्ष, बिरसा सेना), सत्य नारायण मुर्मू, बबलू सोरेन, चंदन कुमार गुप्ता, पीड़िता के भाई और दीदी उपस्थित रहे। जिन्होंने पुलिस अधीक्षक निशिता द्विवेदी (IPS) के साथ वार्ता के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने दोषी पुलिसकर्मियों की शीघ्र गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच तथा कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग रखी। इस पर पुलिस अधीक्षक ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि मामला उनके संज्ञान में है तथा उपलब्ध तथ्यों एवं जांच के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


बैठक के उपरांत प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) श्री दुसरू बानसिंह को भी लिखित आवेदन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की। इस दौरान शंकर सेन माहली (जोग माझी, आदिम माहली महाल), दिनकर कच्छप (अध्यक्ष, बिरसा सेना), पीड़िता के दीदी और भाई, सत्य नारायण मुर्मू, जवाहर लाल माहली, चंदन साव, उपस्थित रहे।


आदिवासी समाज ने प्रशासन को यह भी अवगत कराया कि पीड़िता अभी अस्पताल में उपचाररत है। यदि पीड़िता के स्वास्थ्य में कोई गंभीर गिरावट आती है अथवा उसके साथ कोई अप्रिय घटना घटित होती है, तो इसकी जवाबदेही संबंधित पुलिस प्रशासनिक तंत्र पर ही निर्धारित की जाएगी। शंकर सेन माहली ने मांग की कि पीड़िता को समुचित चिकित्सा, सुरक्षा एवं न्याय सुनिश्चित किया जाए।


प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज संविधान, लोकतंत्र और विधि के शासन में विश्वास रखता है तथा न्याय की मांग पूरी तरह शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से कर रहा है। किंतु यदि मामले में निष्पक्ष एवं समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती है और दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कानून के अनुरूप कदम नहीं उठाए जाते हैं, तो आदिवासी समाज व्यापक लोकतांत्रिक जनआंदोलन के लिए बाध्य होगा।


आदिवासी समाज ने प्रशासन से पुनः मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध शीघ्र कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके तथा जनता का कानून और प्रशासन पर विश्वास बना रहे।


"न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान है।"


उलगुलान जिंदाबाद।

आदिवासी एकता जिंदाबाद।


जोहार 🙏

S S Mahali 🏹

जोग माझी - झारखंड पोनोत

आदिम महली माहाल

(पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था)

एकता • एकरूपता • समृद्धि


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