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मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा जी को श्रद्धांजलि दी गई।
आज मुसाबनी स्थित अस्पताल चौक पर मरांग गोमके Jaipal Singh Munda की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनकी जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आदिवासी समाज के अधिकार, स्वाभिमान और संवैधानिक मूल्यों के लिए उनके अतुलनीय योगदान को स्मरण किया गया। कार्यक्रम के दौरान महान समाज सुधारिका Savitribai Phule की जयंती भी मनाई गई और शिक्षा, नारी सशक्तिकरण, सामाजिक समानता तथा कुरीतियों के विरुद्ध उनके ऐतिहासिक संघर्ष को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह संयुक्त आयोजन सामाजिक चेतना,

S S Mahali
3 जन॰3 मिनट पठन


1 जनवरी 1948 – खरसावां गोलीकांड : शहादत को नमन
1 जनवरी 1948 का दिन भारतीय इतिहास में आदिवासी समाज के लिए एक काले अध्याय के रूप में अंकित है। इसी दिन झारखंड के खरसावां में अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और स्वशासन की मांग को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र हुए निहत्थे आदिवासियों पर अंधाधुंध गोलियाँ चलाई गईं। इस निर्मम गोलीकांड में सैकड़ों निर्दोष स्त्री-पुरुष, युवा और बच्चे शहीद हो गए। यह केवल एक घटना नहीं थी, बल्कि आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों को कुचलने का संगठित प्रयास था। खरसावां के शहीदों ने यह साबित कर दिया कि आदिवा

S S Mahali
1 जन॰2 मिनट पठन


1–2 जनवरी : आदिवासी शहादत के काला दिवस
1–2 जनवरी : आदिवासी शहादत के काला दिवस 1 जनवरी – खरसावां गोलीकांड (1948) 2 जनवरी – कलिंगानगर गोलीकांड (2006) / सिरिंगसिया शहादत दिवस। आदिवासी इतिहास में 1 और 2 जनवरी शोक, संघर्ष और शहादत के प्रतीक दिवस हैं। 1 जनवरी 1948 को खरसावां गोलीकांड में निहत्थे आदिवासियों पर गोलियां चलाकर हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। 2 जनवरी को सिरिंगसिया में आदिवासी वीरों को फांसी दी गई तथा उड़ीसा के कलिंगानगर में अपनी पुश्तैनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे 13 निहत्थे आदिवासियों को प

S S Mahali
31 दिस॰ 20252 मिनट पठन
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