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माघ बोङ्गा धतकी गाँव, डुमुरिया में

अपडेट करने की तारीख: 5 दिन पहले

✨ माघ बोङ्गा के शुभ अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम – धतकी गाँव, डुमुरिया ✨


आज माघ बोङ्गा के पवित्र एवं मंगलमय अवसर पर धतकी गाँव, डुमुरिया में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पूजा अर्चना के बाद पारंपरिक रीति-रिवाज, नियम तथा आदिवासी संस्कृति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी गईं।



इस कार्यक्रम के माध्यम से सभी को –

🌿 पारंपरिक पूजा पद्धति

🌿 पतड़ा – पुरुअ टीपा एवं बेनाव (निर्माण प्रक्रिया)

🌿 पारंपरिक जीवन शैली एवं सांस्कृतिक मूल्यों के बारे में विस्तार से सिखाया एवं समझाया गया।


एस. एस. माहली जी का संबोधन (पेसा नियमावली पर संक्षिप्त एवं प्रभावी वक्तव्य)


माहली जी ने अपने संबोधन में पेसा नियमावली के प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा –


पेसा कानून आदिवासी समाज के लिए केवल एक कानून नहीं, बल्कि हमारे स्वशासन, सम्मान और अधिकारों की सुरक्षा की मजबूत ढाल है। यह कानून ग्राम सभा को सर्वोच्च अधिकार देता है, जिससे गांव अपने संसाधनों, विकास और प्रशासन से जुड़े फैसले स्वयं ले सकें।


उन्होंने बताया कि पेसा नियमावली के अंतर्गत –

✔️ ग्राम सभा को जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का अधिकार है।

✔️ किसी भी परियोजना, खनन या भूमि अधिग्रहण से पहले ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य है।

✔️ गांव के स्तर पर पारंपरिक व्यवस्था, रीति-रिवाज और संस्कृति को कानूनी मान्यता प्राप्त है।

✔️ स्थानीय विकास योजनाओं की निगरानी और नियंत्रण ग्राम सभा के हाथ में होता है।


एस. एस. माहली जी ने कहा कि यदि हम पेसा नियमावली को सही ढंग से समझें और लागू करें, तो कोई भी शक्ति आदिवासी समाज के अधिकारों को कमजोर नहीं कर सकती। इसके लिए जरूरी है कि हर गांव के लोग पेसा कानून के बारे में जागरूक हों और ग्राम सभा को मजबूत बनाएं।


अंत में उन्होंने आह्वान किया कि – हम सब मिलकर पेसा कानून को जानें, समझें और अपनाएं, अपने अधिकारों की रक्षा करें, और आने वाली पीढ़ी के लिए एक सुरक्षित भविष्य तैयार करें।


उन्होंने सभी को माघ बोङ्गा की शुभकामनाएं देते हुए जोहार कहा।


🏆 उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।


🔹 विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता:


🔸 टुकुज दल (हांडी फोड़)

1. सुकुल हांसदा


🔸 रोटे डोन (मेंढक दौड़)

1. संदीप सरदार

2. चितरंजन सरदार


🔸 हांडी बोङ्गा पुरुआ

1. मुगली मार्डी

2. गुरुबारी महाली (टिरिंग)


🔸 कुर्सी दौड़ (Chair Race)

1. संध्या महाली (डुनग्रीडीह)

2. मुगली मार्डी


🔸 बिस्कुट दौड़ (Biscuit Race)

1. देव सरदार

2. चितरंजन सरदार

3. जेम्स पुर्ति


🔸 नव पेडा गोट जोहार

1. सुलुक हांसदा

2. लक्ष्मी मार्डी


🔸 सेरेन (गीत)

1. शकुंतला पुर्ति


🎶 हो समाज की महिला शकुंतला पुर्ति जी ने अपने मधुर स्वर में अत्यंत सुंदर गीत प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।


इस गाँव में विभिन्न आदिवासी जनजाति समुदायों के लोग निवास करते हैं और सभी मिलकर माघ बोङ्गा को हर्षोल्लास, भाईचारे एवं एकता के साथ मनाते हैं।


पोनोत जोग माझी बाबा – माननीय बुधेश्वर मार्डी जी का संबोधन (सार रूप में)


माननीय पोनोत जोग माझी बाबा श्री बुधेश्वर मार्डी जी ने अपने संबोधन में कहा –

हमारा महली समाज एक समृद्ध परंपरा, मजबूत सामाजिक व्यवस्था और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत वाला समाज है। हमारे पूर्वजों ने हमें जो रीति-रिवाज, पूजा-पद्धति, भाषा, गीत-संगीत, नृत्य और जीवन मूल्य दिए हैं, वही हमारी असली पहचान हैं। इन्हें बचाना और आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।


उन्होंने कहा कि परंपरा केवल अतीत की चीज नहीं है, बल्कि यह हमारे वर्तमान और भविष्य की नींव है। यदि हम अपनी परंपराओं से कट गए, तो हमारी पहचान कमजोर हो जाएगी। इसलिए जरूरी है कि हर परिवार अपने बच्चों को बचपन से ही समाज की परंपरा, नियम और संस्कारों से जोड़ें।


सामाजिक एकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि महली समाज की ताकत उसकी एकजुटता में है। जब तक हम आपस में संगठित रहेंगे, तब तक कोई भी शक्ति हमारे अधिकारों, संस्कृति और अस्तित्व को नुकसान नहीं पहुँचा सकती। आपसी मतभेद भुलाकर समाजहित में मिलकर काम करना समय की आवश्यकता है।


सांस्कृतिक पक्ष पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमारे पर्व-त्योहार, जैसे माघ बोङ्गा, केवल उत्सव नहीं बल्कि प्रकृति, जीवन और समाज के प्रति सम्मान का प्रतीक हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना बहुत जरूरी है।


शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में शिक्षा समाज के विकास का सबसे मजबूत आधार है। हमें अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलानी चाहिए, ताकि वे आगे चलकर समाज का नाम रोशन करें और समाज के अधिकारों के लिए मजबूती से आवाज उठा सकें। शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी उतने ही जरूरी हैं।


अंत में उन्होंने सभी से आह्वान किया कि –

हम सब मिलकर महली समाज की परंपरा, संस्कृति और एकता को मजबूत करें, युवाओं को सही दिशा दें, और अपने समाज को विकास के पथ पर आगे बढ़ाएं।


उन्होंने आयोजनकर्ताओं को धन्यवाद देते हुए सभी को माघ बोङ्गा की शुभकामनाएं और जोहार कहा।




🙏 इस पवित्र एवं प्रमुख पर्व के अवसर पर उपस्थित रहे आदिम महली माहाल के प्रबुद्ध लोगों की गरिमा उपस्थित बनी रही।

पोनोत माझी बाबा – बुधेश्वर मार्डी

पोनोत जोग माझी बाबा – एस. एस. महाली

तोरोप जोग माझी बाबा – बसुदेव मार्डी

पुडसी माझी बाबा – अक्लू सोरेन

गाँव के माझी बाबा – लोढ़्या सोरेन

नायके बाबा – हराधन मार्डी

पुरुधुल – खेला मुर्मू

मारे माझी बाबा – लुबिन महाली

सहित अन्य गणमान्य सामाजिक कार्यकर्ता एवं गाँववासी शामिल रहें।


🌺 यह कार्यक्रम हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने, आगे बढ़ाने तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सभी आयोजकों, सहयोगियों एवं प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई एवं जोहार!



🌐 अधिक जानकारी/संपर्क करने के लिए अपना विवरण दें।



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